Chandil : आसनबनी में श्रद्धा और परंपरा के साथ संपन्न हुई जाताल पूजा, अच्छी फसल व क्षेत्र की सुख-समृद्धि की कामना…

बिष्णुपद महापात्र 📲9471102055 (wa)
ग्रामीणों ने प्रकृति, ग्राम देवता और पूर्वजों का किया स्मरण, सामाजिक एकता और सांस्कृतिक विरासत संरक्षण का दिया संदेश…..
Seraikella : सरायकेला-खरसवां जिले के चांडिल प्रखंड अंतर्गत आसनबनी गांव में सोमवार को आदिवासी समाज की प्राचीन धार्मिक एवं सांस्कृतिक परंपरा ‘जाताल पूजा’ श्रद्धा, आस्था और पारंपरिक विधि-विधान के साथ संपन्न हुई। इस अवसर पर बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने पूजा-अर्चना में भाग लेकर क्षेत्र की सुख-समृद्धि, अच्छी वर्षा, बेहतर फसल उत्पादन तथा समाज में शांति और भाईचारे की कामना की।
गांव के पारंपरिक धार्मिक स्थल पर आयोजित पूजा में पारंपरिक पुजारियों उच्छप पहाड़िया और भूषण पहाड़िया ने संयुक्त रूप से विधिवत अनुष्ठान संपन्न कराया। पूजा के दौरान प्रकृति, ग्राम देवता एवं पूर्वजों का स्मरण करते हुए किसानों की उन्नति, परिवारों की खुशहाली तथा समाज की समृद्धि के लिए प्रार्थना की गई। श्रद्धालुओं ने देवस्थल पर माथा टेककर अपने परिवार और गांव की मंगलकामना की।
आदिवासी मूलवासी समाज में जाताल पूजा का विशेष महत्व माना जाता है। यह पूजा प्रकृति और देव शक्तियों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने तथा कृषि कार्यों में समृद्धि और भरपूर उपज की कामना के लिए आयोजित की जाती है। ग्रामीण मान्यताओं के अनुसार यह परंपरा गांव में सुख, शांति और समृद्धि बनाए रखने के साथ-साथ प्राकृतिक आपदाओं और बीमारियों से रक्षा का प्रतीक भी है।
पूजा के दौरान पूरा गांव भक्तिमय वातावरण में सराबोर रहा। देवस्थल को पारंपरिक शैली में सजाया गया था और ग्रामीण सुबह से ही तैयारियों में जुटे हुए थे। अनुष्ठान में फूल, धूप, दीप, नारियल, चावल सहित अन्य पारंपरिक सामग्रियों का उपयोग किया गया। पूजा संपन्न होने के बाद सभी श्रद्धालुओं ने सामूहिक रूप से देवस्थल पर नमन कर गांव की उन्नति और खुशहाली के लिए प्रार्थना की।
इस अवसर पर क्षेत्र के प्रसिद्ध समाजसेवी एवं पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में सक्रिय सुकलाल पहाड़िया भी उपस्थित रहे। उन्होंने पूजा में भाग लेते हुए कहा कि आदिवासी समाज की परंपराएं प्रकृति संरक्षण, सामुदायिक एकता और सांस्कृतिक मूल्यों का सशक्त संदेश देती हैं। उन्होंने युवाओं से अपनी संस्कृति, परंपराओं और विरासत को समझने तथा उन्हें आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि आधुनिकता के इस दौर में भी गांवों में पारंपरिक रीति-रिवाजों का निर्वहन समाज की सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करता है। ऐसी परंपराओं का संरक्षण केवल समाज ही नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए भी आवश्यक है।
पूजा के उपरांत श्रद्धालुओं के बीच प्रसाद स्वरूप खिचड़ी का वितरण किया गया। बच्चों, महिलाओं, युवाओं और बुजुर्गों सहित सभी ग्रामीणों ने सामूहिक रूप से प्रसाद ग्रहण किया। इस अवसर पर गांव में सामाजिक समरसता, आपसी सहयोग और भाईचारे का प्रेरणादायी वातावरण देखने को मिला।
ग्रामीणों ने बताया कि जाताल पूजा केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि सामुदायिक एकजुटता और सामाजिक समरसता का भी प्रतीक है। इस आयोजन के माध्यम से लोग एक साथ मिलकर गांव, समाज और कृषि आधारित जीवन की समृद्धि की कामना करते हैं। साथ ही बुजुर्गों द्वारा युवा पीढ़ी को सांस्कृतिक मूल्यों और परंपराओं की जानकारी भी दी जाती है।
कार्यक्रम में वार्ड सदस्य मलिंद्र उरांव, गुरुचरण कर्मकार, कर्णराज प्रमाणिक, सोनू पहाड़िया, भमर पहाड़िया, जितू पहाड़िया, बैद्यनाथ सिंह सरदार सहित गांव एवं आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे। सभी ने आयोजन की सफलता पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए क्षेत्र की शांति, विकास और समृद्धि की कामना की।
ग्रामीणों का मानना है कि इस प्रकार के पारंपरिक धार्मिक एवं सांस्कृतिक आयोजन समाज को एक सूत्र में बांधने के साथ-साथ सांस्कृतिक पहचान को भी सुदृढ़ करते हैं। जाताल पूजा के सफल आयोजन से आसनबनी गांव में उत्साह, उल्लास और सामुदायिक एकता का सकारात्मक संदेश देखने को मिला।
