पहाड़ियों से घिरा पतरातू डैम प्रदूषण की चपेट में, पावर प्लांट और कॉलोनी की पानी सप्लाई पर भी खतरा

झारखंड के रामगढ़ जिले का गौरव और प्राकृतिक सुंदरता का केंद्र ‘पतरातू डैम’ इन दिनों गंभीर पर्यावरणीय संकट से गुजर रहा है। पहाड़ियों से घिरा यह जलाशय, जो कभी अपनी स्वच्छता के लिए जाना जाता था, अब प्रदूषण की चपेट में है। इससे न केवल पारिस्थितिकी तंत्र को नुकसान पहुँच रहा है, बल्कि क्षेत्र की महत्वपूर्ण जलापूर्ति व्यवस्था पर भी खतरा मंडरा रहा है।
मछली पालन के केज से बढ़ रहा जल प्रदूषण पतरातू डैम में बड़े पैमाने पर हो रहा मछली पालन अब इसके पानी की गुणवत्ता के लिए चुनौती बन गया है। डैम के अंदर स्थापित किए गए मछली पालन के ‘केज’ (Cages) पानी को गंदा कर रहे हैं। मछलियों को दिया जाने वाला अतिरिक्त चारा और उनका अपशिष्ट सीधे पानी में घुल रहा है, जिससे जलाशय का प्राकृतिक संतुलन बिगड़ रहा है और पानी उपयोग के लायक नहीं रह रहा है।
रिसोर्ट, होटल और घरों का गंदा पानी भी जिम्मेदार डैम की खूबसूरती के कारण इसके किनारों पर पर्यटन का तेजी से विकास हुआ है। हालाँकि, यह विकास अपने साथ गंदगी भी लाया है। डैम के पास स्थित कई रिसोर्ट, होटलों और आवासीय क्षेत्रों का दूषित पानी बिना किसी शोधन (Treatment) के सीधे डैम में बहाया जा रहा है। यह लापरवाही जलाशय को प्रदूषित करने में बड़ी भूमिका निभा रही है।
पावर प्लांट और कॉलोनियों की जलापूर्ति पर असर की आशंका पतरातू डैम केवल एक पर्यटन स्थल नहीं है, बल्कि यह इस क्षेत्र की लाइफलाइन है। यहाँ से स्थानीय पावर प्लांट, सीसीएल (CCL) और पीटीपीएस (PTPS) कॉलोनी सहित आसपास के कई गांवों को पानी की सप्लाई की जाती है। यदि प्रदूषण इसी गति से बढ़ता रहा, तो भविष्य में यह पानी पीने और औद्योगिक उपयोग के योग्य नहीं बचेगा, जिससे हजारों लोगों के सामने जल संकट पैदा हो सकता है।
पर्यटन और पर्यावरण दोनों पर खतरा पर्यटकों की पहली पसंद होने के कारण यहाँ हर दिन सैकड़ों लोग आते हैं। बढ़ते प्रदूषण और पानी की खराब स्थिति के कारण न केवल स्थानीय जलीय जीवों पर संकट है, बल्कि इस स्थान का आकर्षण भी कम हो रहा है। अगर जल्द ही सुधारात्मक कदम नहीं उठाए गए, तो क्षेत्र के पर्यटन उद्योग को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है।

स्थानीय लोगों ने उठाई ठोस कार्रवाई की मांग क्षेत्र के जागरूक नागरिकों और पर्यावरण प्रेमियों ने जिला प्रशासन से इस मामले में हस्तक्षेप की गुहार लगाई है। उनकी मांग है कि मछली पालन के नियमों को सख्त किया जाए और डैम के किनारे स्थित होटलों के लिए ‘सीवेज ट्रीटमेंट’ अनिवार्य किया जाए। स्थानीय लोगों का कहना है कि पतरातू डैम को बचाने के लिए एक दीर्घकालिक कार्ययोजना की आवश्यकता है ताकि इस बहुमूल्य जलस्रोत को संरक्षित किया जा सके।
