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November 5, 2026

Suryoday Samvaad

Nayi Soch Nayi Disha

रूस-यूक्रेन युद्ध 5वें साल में: मॉस्को पर नए प्रतिबंध नहीं लगा पाया EU, दो देशों ने लगाया अड़ंगा, कारण क्या?

Russia Ukraine War: यूरोपीय संघ (ईयू) सोमवार को हुई बैठक में रूस के खिलाफ नए प्रतिबंधों पर सहमति नहीं बना सकी. इसकी मुख्य वजह हंगरी की अप्रत्याशित आपत्तियां रहीं. ईयू की विदेश नीति मामलों की प्रमुख काजा कलास ने बैठक के बाद यह जानकारी दी. कलास ने कहा, ‘दुर्भाग्यवश हम 20वें प्रतिबंध पैकेज पर किसी समझौते पर नहीं पहुंच सके. यह एक झटका है. यह एक ऐसा संदेश है, जो हम आज नहीं देना चाहते थे.’

रूस-यूक्रेन युद्ध के चार साल पूरे होने से पहले यूरोपीय राजनयिक ब्रसेल्स में एकजुट हुए थे. उनका मकसद रूस के खिलाफ नए प्रतिबंधों को अंतिम रूप देना और यूक्रेन के लिए बड़े पैमाने पर ऋण सहायता को मंजूरी देना था. हालांकि, हंगरी इन प्रयासों के समर्थन के लिए तैयार नहीं हुआ. उसने न केवल रूस पर और कड़े आर्थिक प्रतिबंधों का विरोध किया, बल्कि कीव की मदद से जुड़े ईयू के हालिया प्रस्तावों पर भी सहमति देने से इनकार कर दिया.

आर्थिक जरूरतों को भी रोक देगा हंगरी

हंगरी को ईयू का वह सदस्य देश माना जाता है, जो रूस के प्रति सबसे ज्यादा नरम रुख रखता है. उसने संकेत दिया कि वह रूस के खिलाफ प्रतिबंधों के साथ-साथ यूक्रेन की सैन्य और आर्थिक जरूरतों के लिए प्रस्तावित 106 अरब अमेरिकी डॉलर के ऋण को भी रोक सकता है. हंगरी ने साफ किया कि जब तक उसे रूसी तेल की आपूर्ति दोबारा शुरू नहीं होती, वह अपने रुख से पीछे नहीं हटेगा. हंगरी और स्लोवाकिया को रूस से कच्चे तेल की आपूर्ति 27 जनवरी से बाधित है.

यूक्रेनी अधिकारियों के मुताबिक, रूसी ड्रोन हमलों में द्रुझबा पाइपलाइन के क्षतिग्रस्त होने के कारण  हंगरी और स्लोवाकिया को रूसी तेल की आपूर्ति ठप पड़ गई है. यही पाइपलाइन यूक्रेनी क्षेत्र से होकर मध्य यूरोप तक रूसी कच्चे तेल की सप्लाई करती है.

स्लोवाकिया ने काटी यूक्रेन की बिजली

इसके साथ ही, रूस से आने वाले कच्चे तेल की आपूर्ति द्रुझबा पाइपलाइन के जरिये निलंबित होने को लेकर बढ़ते विवाद के बीच स्लोवाकिया ने यूक्रेन को दी जा रही आपातकालीन बिजली आपूर्ति रोक दी है. यह घोषणा सोमवार को देश के प्रधानमंत्री रॉबर्ट फिको ने की. फिको ने कहा कि यह कदम तब तक लागू रहेगा, जब तक कीव सोवियत काल की द्रुझबा पाइपलाइन के माध्यम से स्लोवाकिया के लिए तेल पारगमन (ट्रांजिट) बहाल नहीं करता. उन्होंने इस बाबत पहले ही चेतावनी दी थी.

यूरोपीय नेताओं ने समर्थन का किया आह्वान

जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज ने बर्लिन में आयोजित एक कार्यक्रम में रूस-यूक्रेन युद्ध के चार वर्षों को ‘भयावह’ करार दिया. उन्होंने यूरोपीय साझेदारों से यूक्रेन के लिए साझा समर्थन बनाए रखने की अपील की. उन्होंने कहा, ‘मैं अपने यूरोपीय साझेदारों से एक बार फिर अपील करता हूं- यूक्रेन के लिए अपना समर्थन, हमारा साझा समर्थन, जारी रखें. हम एक ऐसे मोड़ पर खड़े हैं, जिसपर हमारे पूरे महाद्वीप की भलाई टिकी हुई है.’

वहीं, पेरिस में फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने कहा कि ‘यूक्रेन को समर्थन देना जारी रखने का हमारा संकल्प अटूट है.’ मैक्रों ने फिनलैंड के राष्ट्रपति एलेक्जेंडर स्टब से भी मुलाकात की. स्टब ने यूरोपीय देशों से आर्थिक प्रतिबंधों के जरिए व्लादिमीर पुतिन पर युद्ध समाप्त करने का दबाव बढ़ाने का आग्रह किया.

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