दुमका में 9 माह से वेतन नहीं मिलने पर कर्मियों का फूटा गुस्सा, स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित

झारखंड के दुमका जिले से स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर एक बड़ी और चिंताजनक खबर सामने आई है। यहाँ विभिन्न सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में सेवाएं दे रहे आउटसोर्सिंग कर्मियों को पिछले कई महीनों से मेहनताना न मिलने के कारण उनमें తీవ్ర आक्रोश है। वेतन न मिलने से परेशान होकर गोपीकांदर, काठीकुंड, सरैयाहाट और दुमका के स्वास्थ्यकर्मी अनिश्चितकालीन हड़ताल पर बैठ गए हैं। पैरामेडिकल एसोसिएशन के नेताओं के नेतृत्व में यह चेतावनी दी गई है कि जब तक उनकी माँगे पूरी नहीं होतीं, तब तक यह विरोध प्रदर्शन जारी रहेगा।

चार आउटसोर्सिंग कंपनियों पर बकाया है लंबा वेतन
प्रदर्शन कर रहे कर्मचारियों के अनुसार, जिले के स्वास्थ्य संस्थानों में विभिन्न आउटसोर्सिंग एजेंसियों के जरिए नियुक्तियाँ की गई हैं, जिनकी गंभीर लापरवाही के कारण कर्मचारियों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। हालात यह हैं कि ‘बिरसा सिक्योरिटी’ के अधीन काम करने वाले कर्मचारियों का 9 महीने का वेतन अटका हुआ है, वहीं ‘शिवा प्रोटेक्शन एजेंसी’ के स्टाफ को पिछले 10 महीनों से एक भी पैसा नहीं मिला है। इसके अतिरिक्त, ‘कमांडो सिक्योरिटी एजेंसी’ के कर्मियों का 6 महीने का और ‘बीएमआर (BMR)’ कंपनी के कर्मचारियों का 8 महीने का बकाया वेतन लंबित चल रहा है।
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र प्रभारियों पर गंभीर आरोप
हड़ताल पर बैठे कर्मियों का यह भी आरोप है कि उच्च स्तर से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों को चार महीने का फंड पहले ही मिल चुका है, इसके बावजूद स्थानीय स्वास्थ्य प्रभारियों द्वारा जानबूझकर उनका वेतन जारी नहीं किया जा रहा है। कर्मचारियों का कहना है कि कई महीनों से पगार न मिलने की वजह से उनके परिवारों के समक्ष भुखमरी की स्थिति पैदा हो गई है। बच्चों की शिक्षा और घर का खर्च चलाना भी दूभर हो गया है, लेकिन इसके बावजूद जिम्मेदार अधिकारी चुप्पी साधे बैठे हैं, जिसे कर्मियों ने सरासर अन्याय बताया है।

जब तक भुगतान नहीं, तब तक जारी रहेगा आंदोलन
पैरामेडिकल एसोसिएशन के प्रमुख रामबृष्ध महतो और राजू कुमार महतो ने स्पष्ट रूप से घोषणा की है कि जब तक सभी आउटसोर्सिंग कर्मचारियों के बकाए वेतन का पूरा भुगतान उनके खातों में नहीं कर दिया जाता, तब तक उनका यह अनिश्चितकालीन आंदोलन पूरी ताकत के साथ जारी रहेगा। स्वास्थ्यकर्मियों के अचानक इस प्रकार काम ठप करने से अस्पतालों की चिकित्सा व्यवस्था पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ना तय माना जा रहा है, और अब देखना यह होगा कि जिला प्रशासन इस मामले में क्या त्वरित कार्रवाई करता है।
