दुमका मेडिकल कॉलेज के नामकरण को लेकर राजनीतिक तकरार तेज, पक्ष-विपक्ष में जुबानी जंग

Dumka News उपराजधानी दुमका के प्रतिष्ठित सरकारी मेडिकल कॉलेज और अस्पताल के नाम बदलने की चर्चाओं और मांगों को लेकर राजनीतिक गलियारों में गरमागरमी काफी बढ़ गई है। सत्ता पक्ष और विपक्ष के नेता इस मुद्दे पर आमने-सामने आ गए हैं, जिससे क्षेत्र का सियासी तापमान बढ़ गया है। जहां एक धड़ा इसके वर्तमान नाम को ही बनाए रखने के पक्ष में है, वहीं दूसरा पक्ष इसमें बदलाव की मांग कर रहा है।
दुमका का यह मेडिकल कॉलेज पहले से ही अपनी बुनियादी सुविधाओं और डॉक्टरों की कमी को लेकर चर्चा में रहता है, लेकिन इस बार इसके नामकरण को लेकर नया विवाद छिड़ गया है। वर्तमान में इसे ‘फूलो झानो मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल’ (PJMCH) के नाम से जाना जाता है। इस नाम को बदलने या इसमें किसी नए नाम को जोड़ने की सुगबुगाहट के बाद से ही विभिन्न राजनीतिक दलों की ओर से बयानबाजी का दौर शुरू हो गया है। स्थानीय कार्यकर्ताओं और नेताओं के बीच इस विषय पर तीखी बहस छिड़ी हुई है।
नामकरण को लेकर क्या है विवाद? सूत्रों के अनुसार, राजनीतिक गलियारों में इस बात को लेकर लॉबिंग तेज हो गई है कि इस बड़े चिकित्सा संस्थान का नाम क्षेत्र के किसी अन्य ऐतिहासिक या राजनीतिक व्यक्तित्व के नाम पर रखा जाए। इस प्रस्ताव का सत्ताधारी गठबंधन से जुड़े कुछ नेता और आदिवासी संगठनों के प्रतिनिधि कड़ा विरोध कर रहे हैं। उनका तर्क है कि फूलो और झानो संताल विद्रोह की महान वीरांगनाएं रही हैं और उनके नाम को हटाना या बदलना क्षेत्र की अस्मिता और आदिवासी इतिहास का अपमान होगा।
दूसरी तरफ, विपक्ष और कुछ अन्य सामाजिक संगठनों का मानना है कि अस्पताल के नामकरण को लेकर एक व्यापक सहमति होनी चाहिए थी। उनका कहना है कि जनभावनाओं को ध्यान में रखते हुए इस पर नए सिरे से विचार करने में कोई बुराई नहीं है। इसी खींचतान की वजह से यह मुद्दा अब केवल प्रशासनिक न रहकर पूरी तरह राजनीतिक रंग ले चुका है।
अस्पताल की व्यवस्था पर भी उठ रहे सवाल इस राजनीतिक बहस के बीच, स्थानीय नागरिकों और बुद्धिजीवियों का कहना है कि नेताओं को नाम बदलने की राजनीति से ऊपर उठकर अस्पताल की बदहाल व्यवस्था को सुधारने पर ध्यान देना चाहिए। दुमका और आसपास के जिलों की जीवनदायिनी माने जाने वाले इस अस्पताल में अक्सर डॉक्टरों की कमी, रेफर किए जाने की समस्या और डायरिया या मौसमी बीमारियों के प्रकोप के समय बेड न मिलने जैसी शिकायतें आती रहती हैं। लोगों का मानना है कि नाम चाहे जो भी हो, सबसे जरूरी बात यह है कि मरीजों को समय पर बेहतर और आधुनिक इलाज की सुविधा मिलनी चाहिए।


