ICHAGARH : ईचागढ़ सीओ के लापरवाह की खामियाजा बुरुहातू ग्राम प्रधान बलभद्र गोराई को भुगतना पड़ रहा है…..

बिष्णु पद महापात्र 📲 9471102055 (wa )
SERAIKELLA : सरायकेला-खरसवाँ जिला अधीन ईचागढ़ प्रखण्ड क्षेत्र के मैसाड़ा पंचायत की बुरुहातू ग्राम प्रधान बलभद्र गोराई को षड़यंत्र कर हटाने की प्रयास से उनका मानदेय रोककर अन्य किसी व्यक्ति को मनमानी ढंग से ग्राम प्रधान चयन करने की इनदिनों क्षेत्र में जोरों से चर्चा हो रही है।
इस संवंध में श्रीगोराई ने कहा है कि उसका ग्राम प्रधान में विधिवत चयन 2006 को हुई थी और तब से ही वह निरंतर अपनी ग्रामवासियों को सेवा देते आ रहे है। जिसका ग्राम प्रधान का परिचय पत्र भी अंचल कार्यालय से निर्गत किया गया। उन्होंने कहा कि जब तक ग्राम प्रधान का मानदेय नहीं था तब तक न तो कोई अधिकारी ग्राम प्रधान को पूछता था और न ही कोई ग्राम प्रधान के लिए दाबा कर रहा था, लेकिन वर्ष 2019 को ग्राम प्रधान की मानदेय मिलने की सरकारी घोषणा होते ही तत्काल पदस्थापित रहे ईचागढ़ सीओ के द्वारा बुरुहातू गाँव में अन्य गाँव के लोगों का नाम जोड़कर उसे ग्राम प्रधान की मानदेय देने लगा । लेकिन पूर्व से चयनित ग्राम प्रधान बलभद्र गोराई को ही ग्राम प्रधान की मानदेय से वंचित रखा गया ।
जिसका विरोध करने पर श्रीगोराई को अंचल कार्यालय से यथा शीघ्र समाधान हेतु सिर्फ आश्वासन मिलने लगा । इसकी आश में 77 वर्षीय ग्राम प्रधान बलभद्र गोराई ने वह पिछले करीब दो साल से अंचल कार्यालय का चक्कर लगाता रहा लेकिन अब तक उसे ग्राम प्रधान की मानदेय से वंचित रखा गया। वहीं श्रीगोराई ने अपनी आवाज बुलंद की तो आज सच्चाई सामने आने लगी, कि किस तरह ईचागढ़ अंचल कार्यालय में एक चयनित जन प्रतिनिधि को ही हटाने की षड़यंत्र पर पर्दे के पीछे बोली लग रहा है और लेन देन कि खेल चल रही है।
इसे हल्के में बिल्कुल नहीं लिया जाना चाहिए वाकई गंभीर मामला है और जाँच का विषय है । इसलिए कि बुरुहातू गाँव मे पूर्व से चयनित ग्राम प्रधान बलभद्र गोराई के रहते हुए उन्हें मानदेय से वंचित रखकर अन्य पड़ोस गाँव से दो व्यक्ति की एक साथ ग्राम प्रधान में नाम जोड़कर उसे मानदेय दिए जाने के पीछे क्या वजह हो सकती है तथा यह अंचल कार्यालय में अनधिकृत रूप से एक चयनित जनप्रतिनिधि की अधिकार पर हस्तक्षेप करना तथा उनके साथ पक्षपात कर उनकी मानदेय को रोकने जैसे गैर कानूनी कार्य आखिर किसके इशारे पर किया गया है और अंचल कार्यालय में वह कौन है जिसका दबदबा चलता है और आखिर वो शख्स कौन है जो अंचल कर्मियों की यह घोर लापरवाही के विरुद्ध अब तक किसी को सवाल खड़ा करने को नहीं दिया गया है, यह तो जाँच से ही पता चलेगा।
इससे स्पष्ट हो रही है कि उक्त मामले की निष्पक्ष जांच हुई तो ईचागढ़ अंचल कार्यालय के कई कर्मी एवं अधिकारी को सलाखों के पीछे जाने से कोई रोक भी नहीं सकते। इधर इस संवंध में पूछे जाने पर ईचागढ़ सीओ दीपक प्रसाद ने बताया कि ग्राम प्रधान की चयन को लेकर कोई साक्ष्य न मिलने की कारण ही आज ग्राम प्रधान की मानदेय के लिए यह समस्या हो रहा है। वहीं बुरुहातू गाँव के ग्रामीणों ने भी हस्ताक्षर युक्त लिखित आवेदन देकर जिक्र किया कि उनके गाँव मे पूर्व से ही बलभद्र गोराई ने ग्राम प्रधान की सेवा देते आ रहें हैं, जिनका मानदेय दिया जाय। इसपर जो भी त्रुटि हुई वह तत्काल पदस्थापित ईचागढ़ सीओ एवं नाजीर के द्वारा हुई है। इस पर देखा गया कि बुरुहातू गाँव मे ही पहले दो ग्राम प्रधान हरेलाल महतो (हरितालडीह ) तथा श्रवण माँझी ( हुंडी ) को ग्राम प्रधान का मानदेय मिल रहा था । जो अन्य गाँव के होते हुए भी मार्च, 2019 से जून, 2019 तक ग्राम प्रधान का मानदेय ले चुका है जबकि बलभद्र गोराई को जुलाई, 2019 से फरवरी, 2020 तक ही ग्राम प्रधान का मानदेय मिला। इस बीच में हुड़लूंग गाँव के रहनेवाले सनातन मांझी का भी ग्राम प्रधान में उसका नाम जोड़ा गया था, जिसके पास कोई साक्ष्य न होने की कारण वह अंचल कार्यालय में कोई दाबा नहीं कर पाया, यह सभी तत्कालीन अधिकारी की कार्यकाल में हुआ । इस संवंध में फिलहाल बलभद्र गोराई ने अंचल कार्यालय में आकर आग्रह किया है जिन्हें पूर्ववत ग्राम प्रधान का मानदेय मिले, तथा उनके पक्ष में कार्यालय में आकर ग्रामीणों ने भी आवेदन प्रस्तुत किया इसलिए बलभद्र गोराई को ग्राम प्रधान का मानदेय दिलाने हेतु प्रक्रिया जारी है ।
बताते चलें कि ईचागढ़ अंचल कार्यालय की लापरवाही के कारण ही आज सरकारी खजाने की बंदरबांट हो रहा है और विभाग मौन है। इसे भी नकारा नहीं जा सकता कि आज अगर उक्त बलभद्र गोराई ने यह आवाज नहीं उठाते तो शायद ही किसी को ईचागढ़ अंचल अधिकारी एवं नाजीर के मिलजुल कर हो रही लेन देन का खेल का राज का पता चलता।
