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October 27, 2026

Suryoday Samvaad

Nayi Soch Nayi Disha

जगन्नाथ रथ यात्रा 2026: देव स्नान यात्रा से होगी शुरुआत, जानें नेत्रोत्सव और रथयात्रा की पूरी टाइमलाइन

विश्व प्रसिद्ध भगवान जगन्नाथ की वार्षिक रथयात्रा उत्सव को लेकर भक्तों और प्रशासन की तैयारियां तेज हो चुकी हैं। इस साल इस पावन महोत्सव का आगाज पारंपरिक देव स्नान यात्रा के साथ होने जा रहा है। सनातन परंपरा के मुताबिक, स्नान पूर्णिमा के पवित्र स्नान के बाद भगवान जगन्नाथ, भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा अगले 15 दिनों के लिए अनवसर यानी एकांतवास में चले जाएंगे। इस ‘अनासार’ काल के दौरान भक्तों को भगवान के मुख्य विग्रहों के दर्शन नहीं मिल सकेंगे। एकांतवास समाप्त होने के बाद, 15 जुलाई को नेत्रोत्सव का आयोजन होगा और 16 जुलाई को भव्य रथयात्रा निकाली जाएगी, जिसके साथ ही 10 दिनों तक चलने वाले ऐतिहासिक मेले की भी शुरुआत हो जाएगी।

देव स्नान यात्रा का कार्यक्रम

देव स्नान यात्रा को लेकर मंदिर प्रांगण में सभी जरूरी व्यवस्थाएं और अनुष्ठान पूरे कर लिए गए हैं। समय सारणी के अनुसार, स्नान यात्रा का मुख्य पूजन दोपहर 1:00 बजे से आरंभ होकर 1:45 बजे तक संपन्न होगा। इसके तुरंत बाद, दोपहर 1:50 बजे महाआरती की जाएगी। दोपहर 2:00 बजे से लेकर दोपहर 3:30 बजे तक आम श्रद्धालुओं को भगवान के जलाभिषेक का सौभाग्य मिलेगा। इस पावन बेला पर 108 मंगल आरती के साथ-साथ जगन्नाथ अष्टकम और श्रीमद्भगवद्गीता के पाठ का विशेष आयोजन किया जाएगा।

15 दिन रहेंगे एकांतवास में भगवान

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, ज्येष्ठ पूर्णिमा के दिन अत्यधिक जल से स्नान करने के कारण भगवान जगन्नाथ बीमार (अस्वस्थ) हो जाते हैं। यही वजह है कि वे अगले 15 दिनों के लिए एक गुप्त कक्ष में एकांतवास में चले जाते हैं, जहां उनका प्राकृतिक उपचार होता है। इस अवधि में मुख्य गर्भगृह के पट बंद रहते हैं और श्रद्धालु केवल भगवान के राधा-कृष्ण स्वरूप के ही दर्शन कर पाते हैं। इस दौरान प्रभु का पंचगव्य, शुद्ध दूध, गाय का घी, शहद, गंगाजल और कई प्रकार के सुगंधित द्रव्यों व जड़ी-बूटियों से विशेष लेप व अभिषेक किया जाता है।

53 पवित्र कलशों से होगा अभिषेक

इस वर्ष आयोजित हो रही देव स्नान यात्रा के महा-अनुष्ठान के लिए विशेष तौर पर 53 पवित्र कलश तैयार किए गए हैं। इन कलशों में औषधीय जल के साथ गंगाजल, अश्वगंधा, शहद, हल्दी, इत्र और अन्य सुगंधित पूजन सामग्रियां मिलाई जाएंगी। इस महास्नान की शुरुआत सबसे पहले बड़े भाई भगवान बलभद्र के अभिषेक से होगी, जिसके बाद माता सुभद्रा और सबसे अंत में जगत के नाथ भगवान जगन्नाथ को स्नान कराया जाएगा।

16 जुलाई को निकलेगी भव्य रथयात्रा

15 दिनों का एकांतवास पूरा करने के बाद, 15 जुलाई को भगवान भक्तों को नवयौवन रूप में दर्शन देंगे, जिसे नेत्रोत्सव कहा जाता है। इसके अगले दिन यानी 16 जुलाई को तीनों दिव्य विग्रह विशाल और भव्य रथों पर सवार होकर अपनी मौसी के घर (मौसीबाड़ी) के लिए प्रस्थान करेंगे। वहां नौ दिनों तक विश्राम और प्रवास करने के बाद, 25 जुलाई को भगवान की मुख्य मंदिर में ‘बहुड़ा यात्रा’ (घोष यात्रा) के जरिए गरिमामयी वापसी होगी। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, स्नान पूर्णिमा का दिन ही रथयात्रा उत्सव की औपचारिक शुरुआत का प्रतीक माना जाता है।

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