मंईंया सम्मान योजना के लाभुक इस नंबर से रहें सतर्क, साइबर हैकर्स की है नजर, प्रशासन ने जारी किया अलर्ट

झारखंड की महिलाओं के लिए चलाई जा रही महत्वाकांक्षी ‘मंईयां सम्मान योजना’ पर अब साइबर अपराधियों की टेढ़ी नजर लग चुकी है। राज्य के बोकारो जिले से ठगी का एक बेहद हैरान करने वाला तरीका सामने आया है, जहां शातिर जालसाज योजना की लाभार्थी महिलाओं को अपने जाल में फंसाने की कोशिश कर रहे हैं। इस गंभीर मामले को देखते हुए स्थानीय प्रशासन ने तुरंत कड़ा रुख अपनाते हुए आम जनता और लाभार्थियों के लिए अलर्ट जारी कर दिया है।
बोकारो के पिंड्राजोरा क्षेत्र में इन दिनों राज्य सरकार की इस लोकप्रिय योजना के नाम पर बड़े पैमाने पर साइबर ठगी की साजिश रची जा रही है। शातिर ठग योजना की लाभार्थी महिलाओं को फोन करके यह झूठा डर दिखा रहे हैं कि उनके आवेदन पत्र या वेरिफिकेशन (सत्यापन) में बड़ी खामी आ गई है। डराने वाली बात यह है कि ये ठग ग्रामीण महिलाओं को गुमराह करने के लिए स्थानीय प्रखंड कार्यालय (Block Office) के बड़े अफसरों के नाम का इस्तेमाल कर रहे हैं। इसके बाद वे महिलाओं से उनके आधार कार्ड की गोपनीय डिटेल और पैसों की मांग कर रहे हैं, जिससे पूरे इलाके में हड़कंप मच गया है।
‘सत्यापन’ के नाम पर मांगा जा रहा है पैसा
सामने आई शिकायतों के अनुसार, रविवार को क्षेत्र की कई महिलाओं के मोबाइल फोन पर 7024887455 नंबर से संदिग्ध फोन कॉल्स आए। कॉल करने वाले अज्ञात जालसाज ने खुद को मंईयां सम्मान योजना से जुड़े विभाग का सरकारी अधिकारी बताया। उसने महिलाओं को डराते हुए कहा कि आपके बैंक खाते और आवेदन के सत्यापन में बड़ी गड़बड़ी मिली है, और यदि इसे तुरंत ठीक नहीं किया गया तो योजना के तहत मिलने वाली अगली किस्त हमेशा के लिए रोक दी जाएगी। इस कथित सुधार के नाम पर ठग ने महिलाओं से उनके आधार कार्ड की फोटो और नंबर मांगे, साथ ही मोबाइल के जरिए तुरंत कुछ पैसे ट्रांसफर करने का भारी दबाव भी बनाया।
चास बीडीओ बोले- ‘पूरी तरह फर्जी हैं ऐसे फोन कॉल’
इस संवेदनशील और गंभीर मामले की भनक लगते ही चास के प्रखंड विकास पदाधिकारी (BDO) प्रदीप कुमार ने तुरंत एक्शन लिया है। उन्होंने एक आधिकारिक चेतावनी जारी करते हुए साफ कहा है कि इस तरह के सभी फोन कॉल्स पूरी तरह फर्जी हैं और यह साइबर ठगों द्वारा बुना गया एक सुनियोजित जाल है। बीडीओ ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि मंईयां सम्मान योजना के किसी भी प्रकार के सत्यापन, सुधार या अन्य कागजी प्रक्रिया के लिए प्रखंड कार्यालय अथवा सरकार की किसी भी एजेंसी की ओर से कभी भी किसी लाभार्थी को फोन नहीं किया जाता है। सरकारी योजना का लाभ पूरी तरह निःशुल्क और पारदर्शी है, इसलिए किसी के झांसे में न आएं।
दस्तावेज या बैंक डिटेल किसी से न करें साझा
बीडीओ प्रदीप कुमार ने क्षेत्र की तमाम लाभार्थी महिलाओं और आम नागरिकों से पुरजोर अपील की है कि वे अपनी सुरक्षा के प्रति बेहद सतर्क रहें। उन्होंने कहा कि यदि कोई भी व्यक्ति चास प्रखंड कार्यालय या किसी अन्य सरकारी दफ्तर का हवाला देकर आपसे आपके निजी दस्तावेज, बैंक खाते की जानकारी, आधार कार्ड, ओटीपी (OTP) या फिर पैसों की मांग करता है, तो उसे अपनी कोई भी डिटेल बिल्कुल न दें। सजगता और समझदारी ही साइबर अपराध से बचने का एकमात्र अचूक उपाय है। किसी भी प्रकार का संदिग्ध कॉल आने पर तुरंत इसकी शिकायत स्थानीय पुलिस या संबंधित अधिकारियों से करें।
