रामगढ़: रजरप्पा छिलका पुल किनारे हटाए गए दुकानदारों ने पुनर्वास की मांग उठाई

झारखंड के रामगढ़ जिले में स्थित प्रसिद्ध रजरप्पा छिलका पुल के समीप से बेदखल किए गए दुकानदारों ने अपने विस्थापन के खिलाफ आवाज बुलंद की है। प्रभावित व्यवसायियों ने अपनी समस्याओं को लेकर रामगढ़ के उपायुक्त (DC) के जनता दरबार का रुख किया और वहां एक औपचारिक मांग पत्र (ज्ञापन) सौंपा। इस शिकायत को आधिकारिक तौर पर आवेदन संख्या CMP000416 के तहत दर्ज किया गया है। साथ ही, मामले की गंभीरता को देखते हुए इसकी प्रतिलिपि रामगढ़ के अनुमंडल पदाधिकारी (SDO) को भी आवश्यक कार्यवाही के लिए प्रेषित की गई है।
बिना नोटिस दुकान तोड़ने का आरोप
पीड़ित दुकानदारों का कहना है कि सुविख्यात मां छिन्नमस्तिका मंदिर रजरप्पा क्षेत्र में इन दिनों प्रशासन की ओर से सुंदरीकरण (ब्यूटीफिकेशन) का काम चलाया जा रहा है। इसी विकास कार्य की आड़ में छिलका पुल के पास वर्षों से लगी दुकानों को अचानक ध्वस्त कर दिया गया। व्यवसायियों ने आरोप लगाया कि हालांकि क्षेत्र में अतिक्रमण हटाने का नोटिस पहले जारी हुआ था, लेकिन कई विशिष्ट दुकानों पर बिना किसी पूर्व सूचना या तय समय दिए बिना ही अचानक बुलडोज़र चला दिया गया, जो पूरी तरह अनुचित है।
वैकल्पिक व्यवस्था की मांग
जनता दरबार पहुंचे दुकानदारों ने जिला प्रशासन से पुरजोर गुहार लगाई है कि जो लोग लंबे समय से यहां दुकान चलाकर अपना जीवन-यापन कर रहे थे, उनके लिए जल्द से जल्द कोई वैकल्पिक जगह अलॉट की जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे किसी भी तरह से विकास कार्यों के विरोधी नहीं हैं और न्यायालय के दिशा-निर्देशों का पूरी तरह सम्मान करते हैं। लेकिन इसके साथ ही, प्रभावित परिवारों को उजड़ने से बचाने के लिए उचित पुनर्वास (Rehabilitation) की व्यवस्था करना भी प्रशासन की नैतिक जिम्मेदारी है।
पहले भी हुई थी बैठक
दुकानदारों ने अतीत का हवाला देते हुए बताया कि इस संकट को लेकर बीती 6 मई 2026 को रामगढ़ के अनुमंडल पदाधिकारी के साथ उनकी एक औपचारिक वार्ता भी हुई थी। उस बैठक के दौरान अधिकारियों ने मौखिक रूप से अपनी मांगें लिखित रूप में प्रस्तुत करने का निर्देश दिया था। प्रशासन के कहे अनुसार दुकानदारों ने समय पर अपना आवेदन सौंप भी दिया, मगर इसके बावजूद अधिकारियों की ओर से विस्थापितों के पक्ष में कोई ठोस या सकारात्मक कदम नहीं उठाया गया।
आर्थिक संकट की स्थिति

प्रभावित दुकानदारों ने अपना दर्द बयां करते हुए कहा कि बिना किसी वैकल्पिक इंतजाम के रोजगार छिन जाने से उनके परिवारों के सामने भुखमरी की नौबत आ गई है। रोजमर्रा की कमाई का एकमात्र जरिया खत्म होने के कारण वे बेहद गंभीर आर्थिक तंगी के दौर से गुजर रहे हैं और अपने बच्चों की परवरिश को लेकर चिंतित हैं।
ये लोग रहे उपस्थित
उपायुक्त के जनता दरबार में अपनी मांगों को प्रमुखता से रखने के लिए दुकानदारों के साथ JLKM के प्रदेश मीडिया प्रभारी रमेश कुमार महतो भी मौजूद थे। इसके अलावा पीड़ित व्यवसायियों और सक्रिय सदस्यों में भीम महतो, कुलदीप महतो, विशुन महतो, रोहित केवट, अरुण महतो, आकाश तुरी सहित भारी संख्या में स्थानीय दुकानदार उपस्थित रहे।
